Aug 14, 2008

कॉलेज में को-एजुकेशन-अंितम

माहौल गरमाते मम्मी-डैडीवाले लड़के कॉलेज छोड़ िदये
चुनाव पऱचार छोड़ सभी तमंचा जुगाड़ने में लगे थे
लड़िकयां गदहे की िसंग की तरह गायब हो गयीं थीं
बम फूटने लगे थे,तमंचे चमकने लगे थे
पटनिहया भारी पड़ रहे थे

कॉलेज जीवन के तीन साल में छातर संघ चुनाव का दूसरा अनुभव मुझे िमलनेवाला था। लड़के खुश थे। कारण था इस बहाने लड़िकयों से िमलने का मौका। यहां बताता चलूं िक कॉलेज के अिधकांश लड़के गऱामीण इलाके के थे। जो पटनिहया थे,उनमें से भी अिधकांश की जड़े गांवों में थी। चुनाव की दुंदुभी बजते ही कॉलेज का माहौल बदल गया था। इंटर के लड़के पहली बार चुनाव देख रहे थे,इसिलए वे कुछ ज्यादा ही उत्सािहत थे। जैसा िक मैने पहले के लेख में उल्लेख िकया है िक इस बार १९७७ के चेहरे गायब थे। १९८० का रंग भी अलग था। नवल िकशोर यादव के साथ पटना के पुनाइचक,अादमी गांव और िबरादरी के लोग लामबंद हो गये थे। नवल मेरे साथ साइक्लॉजी अॉनसॆ में थे। गजेन्दऱ िसंह और िजतेन्दऱ िसंह की एक ही जाित होने के कारण मामला उलझ गया था। दोनों के संपकीॆ उनके साथ हो िलये थे। अब यह लगने लगा था िक रामकृपाल यादव की तरह नवल भी चुनाव न जीत जाये। रामकृपाल के समय उनके करिबगिहया के साथी बॉिक्संग गलब्स पहन कर अाये थे। और भी बहुत से हिथयार चमके थे। यह बात इसबार के उम्मीदवारों के जेहन में थी।
चुनावी रणनीित बनने लगी थी। पऱचार पर कम जोर था। ज्यादा जोर बम और हिथयार के साथ अादमी जुगाड़ने पर था। नवल के मुहल्ले के लोग तमंचे और हॉकी िस्टक के साथ कॉलेज में घूमने लगे थे। पढ़ाकू लड़के (इन्हें मजाक में लड़के मम्मी-डैडीवाला बच्चा कह बुलाते थे)कॉलेज अाना लगभग बंद कर िदये थे। लड़िकयां भी गदहे के िसंग की तरह कैंपस से गायब हो गयीं थीं। कैंपस युद्ध मैदान बन गया था। तीन सेनापितयों के झंडे तले सैिनक लामबद्ध थे। एक दूसरे के खेमे में अपनी हैिशयत का संदेश इस या उस माध्यम से भेजा जाता था। अब तक पटना के नामी रंगबाजों से संपकॆ कर उनकी सेवा िमलने की सूचना से कैंपस में दहशत फैल चुकी थी। िस्थित यह थी िक कायर नहीं समझ िलये जाये,इसिलए डर के बाद भी लड़के कॉलेज अाना नहीं छोड़ पा रहे थे। पढ़ाई ठप हो चुकी थी और पऱोफेसरोंं की मौज थी।
जैसे-जैसे चुनाव की ितिथ नजदीक अाती जा रही थी तनाव और गहराता जा रहा था। नवल जीत की अोर थे। िजतेन्दऱ और गजेन्दऱ में से एक को बैठाने की कोिशशें शुरू हो चुकी थी। खांटी पटनिहया होने के कारण गजेन्दऱ भारी पड़े और िजतेन्दऱ को मैदान छोड़ना पड़ा। अब लड़ाई अामने-सामने की थी। मतदान के एक सप्ताह पहले से बम फोड़े जाने लगे। तेज अावाज और भगदड़ का यह िसलिसला चुनाव के िदन तब थमा जब दोनों पॐों के बीच पुिलस खड़ी कर दी गयी। तनाव और दहशत के माहौल में अल्प मतदान हुअा। गजेन्दऱ जीत गये। लेिकन अागे कोई अनहोनी न हो इसके िलए उन्हें रंगबाज लड़कों की टोली की सुरॐा लेनी पड़ी। नवल का गऱुप भी कुछ एेसी ही िस्थित में था। माहौल सामान्य होने में महीनों लगा। कॉलेज कैंपस पुरानी रंगत में लौटा। मम्मी-डैडी वाले लड़के भी िकताब-कॉपी के साथ नजर अाने लगे। लड़िकयां भी लौटीं। बहार अायी। (नवल राजद के िवधान पाषॆद होने के साथ गुरु गोिवंद िसंह कॉलेज,पटना िसटी में लेक्चरर भी हैं।

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