कलम छूट जाती थी कंघी नहीं
लड़िकयों के कॉमन रूम के गोपन को अोपन करते लड़के
गड़बड़ िसंह हड़बड़ समाचार सुनाते पतरकार बन गये
रामकृपाल (वतॆमान सांसद)के अाते िवजय पतली गली से िनकल िलये
मैं सन् ७७ में स्कूल को बॉय-बॉय कर कॉलेज में गया। १६ साल का था। पटना के एएन कॉलेज में को-एजुकेशन से पहला सबाका था। लड़िकयों और लड़कों ने अपना-अपना गऱुप बना िलया था। कैंपस में हमलोग सहज नहीं थे। लड़िकयां क्या बितयाती थी,नहीं पता। लेिकन लड़को का गऱुप पढ़ाई की बात कभी-कभी ही करता था। हां सामने लड़िकयां हों,तो िसफॆ पढ़ाई की ही बात होती थी। लड़िकयां कॉलेज से गाहे ब गाहे अनुपिस्थत भले हो जाती थी,लेिकन लड़कों का अटेन्डेंस पूरा रहता था। हम अापस में चुहल करते-कलम भले घर में छूट जाये कंघी नहीं छूटनी चािहए। लड़के मनाते िक क्लास लीजर हो जाये। यही वो समय होता था जब लड़िकयों से िमलने-जुलने का संिॐप्त मौंका िमलता था। धीरे-धीरे लड़िकयां भी इसे समझ गयी। मंशा को भांप वे एेसी िस्थित में सीधे गल्सॆ कॉमन रूम में जाने लगीं। उनका कॉमन रूम भी कम रहस्मय नहीं था। दरवाजे पर एक दाई की ड्यूटी रहने के कारण भीतर का रहस्य और गहरा गया था। िजतने मुंह, उतनी बातें थी। लड़के अपनी-अपनी तरह से भीतर के गोपन को अोपन करते। कुछ लड़िकयां टेबुल टेिनस का शौक रखती थीं। इसके िलए उन्हें ब्वायज कॉमन रूम में जाना पड़ता था। उस समय कॉमन रूम में भीड़ हो जाती थी। पहले से टेबल टेिनस पर हाथ अजमा रहे लड़कों की चांदी हो गयी थी। लड़िकयों को िसखाने-बताने और उनके साथ खेलने से वे कॉलेज के अन्य लड़कों के बीच िवलेन बन गये थे। कई िकऱकेिटयर भी टेबल टेिनस खेलने लगे। बकझक भी शुरू हो गयी। मामला इंचाजॆ तक पहुंचा और कुछ लड़कों के कॉमन रूम में अाने से मना कर िदया गया। अािखर ईष्या की अाग धधकी और अोिरिजनल िखलाड़ी इस या उस बहाने टारगेट िकये जाने लगे। हद तो तब हो गयी जब उनकी िपटाई तक मामला जा पहुंचा। लड़कों के कॉमन रूम से लड़िकया कन्नी काटने लगीं। इसी के साथ लड़कों की रुिच भी खत्म होने लगी।
जाड़े का समय अा गया था। अाट्सॆ ब्लाक का अांगन धूप सेंकनेवालों से गुलजार रहने लगा। छातर संघ के चुनाव का िवगुल बज चुका था। हमारे सहपाठी िवजय िसंह अध्यॐ के उम्मीदवार बन गये थे। एक कांिबनेशनवाले हम सभी लड़के उनके िपछलग्गू बन गये थे। वे िसर पर बड़ी सी िटक रखते थे और बड़ी बात यह थी िक लड़िकयों से बात करने में घबराते नहीं थे। धूप सेंक रही लड़िकयों के पास वे बेधड़क पहुंच जाते और हम जैसे सािथयों के हुजूम के साथ सबसे पहले एक हाथ से अपनी लंबी िटक उठा शुरू हो जाते- यह बीबीसी लंदन है। अब अाप गड़बड़ िसंह से हड़बड़ समाचार सुिनये। वे सुनाते जाते। लड़के-लड़िकयां िखलिखलाते रहते। उनका यह अंदाज कॉलेज का नया शगल बन गया। लड़िकयों से वे बस इतना कहते अाप वोट देने के िलए हामी भर दीिजये,हम अापका वोट ले लेंगे। उनकी चुनावी घोषणा भी अजब-गजब थी। िसटी बस में मुफ्त सफर की उनकी घोषणा मतदान के पहले ही कंडक्टरों-डराइवरों से मारपीट के साथ बस सेवा बंद होने के रूप में सामने अाया। अब वे िसफॆ मसखरा ही नहीं दबंग भी बन गये थे।
चुनाव के िदन िपछले अध्यॐ रामकृपाल यादव (वतॆमान में राजद के सांसद)अपने गुगोॆ के साथ कॉलेज अाये और िवजय िसंह पतली गली से िनकल िलये। हंगामा हुअा और चुनाव रद्द हो गया। असेॆ बाद िवजय िसंह पटना रेलवे स्टेशन पर िमले। पता चला िक पतरकार बन गये हैं। अाज अखबार में कऱाइम िरपोिटॆंग कर रहे हैं।
बीए में गया, तो एक बार िफर छाॊ संघ चुनाव की तैयारी शुरू हो गयी। इस बार िवजय िसंह सीन से गायब थे। पुनाइचक मुहल्ले से अानेवाले नवलिकशोर यादव (वतॆमान में राजद के िवधान पाषॆद),बाबा बलराम के लड़के गजेन्दऱ िसंह और िवधायक उमाशंकर िसंह के लड़के िजतेन्दऱ िसंह (महराजगंज से िजतेन्दऱ स्वामी के नाम से संसदीय चुनाव लड़ चुके हैं और िफलवक्त िविभन्न मामलों में जेल में हैं)मैदान में थे।
Aug 12, 2008
Subscribe to:
Comments (Atom)