लालू बोले-इ बाबा रामदेव का दवाई है
लालू यादव अाज टेंशन में नहीं लग रहे थे। लोग उन्हें घेर रखे थे और वे कुछ एेसा-वैसा बोल रहे थे,िजससे लोग लगातार हंसे जा रहे थे। मुझे देख बोले-इ बाबा रामदेव का दवाई है। फऱी में हंिसये और टनाटन रिहये। मैं भी हंसा और लालू के साथ अपने इंटरव्यू को अागे बढ़ाने के िलए मौका देखने लगा। वे समझ गये। कहा-हमेशा हड़बड़ी में रहते हो। अाराम से बइठते हैं,बातचीत भी होगी और साथ में पेट पूजा भी करते रहेंगे। कुछ देर बाद वह मौका िमला। अॉफ दी िरकाडॆ की शतॆ के साथ मैं शुरू हो गया।
सवालः अाज अाप मूड में दीख रहे हैं,कोई िवशेष बात है क्या?
जवाबः वैसा कुछ नहीं है,बाकी हमरा जगह अब सुशासन बाबू (नीतीश कुमार)टेंशन में हैं। हमको और राबड़ी को १५ साल तक गिरयाया और अब देखो सुशासन में पटना का जल और मल एके में िमल गया है। हाइकोटॆ जब बोला िक पटना कूड़े के ढेर पर है,तो उसका मंतरी कोटॆ को ही अटपट बोलने लगा। नीतीश अब अकबकी में मंतरी को समझा रहे हैं िक कोटॆ को नहीं बोला जाता है खाली सुना जाता है।
सवालः वाइफ से टेंशन के बारे में खुल कर नहीं बताये?
जवाबः देखो भाई हम तो सब के बारे में सोचते हैं। शुरुअात घरे से करते हैं। राबड़ी को चौका बरतन छुड़वाकर मुख्यमंतरी बनवाया। उनका दो गो भाई को िवधायक सांसद बनवाया। का नहीं िकया। िवरोधी सब का-का नहीं बोला,बाकी हम टस से मस नहीं हुए। अपने गांव से ससुराल को रेल लाइन से जोड़ा। केतना िगनाये। अब राबड़ी हड़बड़ी में हैं िक साहब िफर से सीएम की कुसीॆ जल्दी जोगािड़ये। यही टेंशन है।
सवालः इसके िलए क्या कर रहे हैं?
जवाबः हड़बड़ाने से कुछो िमलता है? हमहूं तो पीएम बनना चाहते हैं,तो उसके िलए राह-रस्ता न बनाना पड़ता है। रामिवलास को धीरे-धीरे पोिटया रहे हैं। अभी एक मंच पर उठना-बैठना शुरू हुअा है। नीतीश के िखलाफ मोरचा खोलना है। पुराना लोग को िफर से जोड़ना है। उसके बाद हल्ला बोलेंगे।
सवालः लेिकन रामिवलास तो अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं?
जवाबः अकेला चना भाड़ नहीं फोरता,यह उनको समझ में अा गया है। पोलिटक्स है,अादमी कुछो-कुछो बोलता रहता है। ज्यादा ध्यान देने पर इहो कवनो कम टेंशन नहीं देता।
सवालः नीतीश भी तो कभी अापके साथ थे?
जवाबः हां,थे न। जब देखा िक यहां सीएम बनने का चांस नहीं है,तो अटपट बोल मूड़ीकटवा पाटीॆवाला के साथ हो िलये। बुढ़ऊ जाजॆ को भी पट्टी पढ़ाकर अपना खेमा में कर िलया। अब देखो उनको कइसे दूध के माछी की तरह बाहर फेंक िदया है।
सवालः रामिवलास ने भी तो अापके चाणक्य पऱोफेसर रंजन यादव को तोड़ िलया था।
जवाबः गये तो वहां,बाकी का हैिशयत रहा। हमरा साथ थे तो राज भोग रहे थे। वहां जाते कौड़ी के तीन हो गये।
सवालः यह अापके साथ क्या हो रहा है िक िजसे भी अाप चाणक्य का दजाॆ देते हैं,वह अापको ही पट्टी पढ़ाने लगता है?
जवाबः हम इशारा समझ गये। बाबा िशवानंद ितवारी को जहां चाभने के िलए िमलता है,वहां वे पसर जाते हैं। माउथ डायिरया की िशकायत पढ़ने के समय से उनको है। अटर-पटर बोल के समझते हैं िक बड़का नेता हो गये। अरे ऊ तो हम कुछ पुराना करजा उतार रहे थे,नहीं तो वे साथ में रखने लायक हैं का। अब नीतीश को पट्टी पढ़ा रहे हैं। उनको भी जल्दीये गिरयायेंगे। बस तेल और तेल की धार देखते चलो।
सवालः वे तो कहते हैं िक अापका भांडा फोड़ेंगे?
जवाबः कहते हैं,कर नहीं न रहे हैं। वे जानते हैं िक हम पोिलिटशयने खाली नहीं हैं। बुखार उतार देंगे। वे जानते हैं िक भंडा फोड़ने के नाम पर अंट-शंट गढें़गे,तो हम उनका कालेज से लेकर अब तक का कच्चा िचट्ठा खोल देंगे। िफर लाजे उ न तो घरे जायेंगे ना पटना में नजर अायेंगे। हिरद्वारे में िठकाना िमलेगा।
सवालः एेसा क्या कच्चा िचट्ठा है अापके पास?
जवाब ः नहीं,इ हम अॉफ दी िरकाडोॆ नहीं बोलेंगे। बात का बतंगड़ बन जाता है।
नोटः लंबे इंटरव्यू का अगला अंश जल्द ही।
Aug 20, 2008
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