Sep 15, 2008

दे िटप्पणी के नाम,तुझको अल्ला रखे

भाई उड़नतश्तरी हर डाल पर बैठे नजर अाते हैं
दे िटप्पणी के नाम,तुझको अल्ला रखे। हजार शब्द िलखते हैं,चार लाइना मेरे नाम िलखे। जो देता है,वह पाता है। मुझे िटप्पणी भेजे, बदले में मेरी पाये। भाई दोनों हाथ से ताली बजती है,एक हाथ मेरा-दूसरा अापका िमल जाये,तो िफर देखे कैसी गूंज होती है।हमारा ब्लॉग िफल्मों की तरह िहट हो जायेगा। चैनलों की तरह टीअारपी चढ़ जायेगी। बछड़ें की मािफक ब्लॉग का सरकुलेशन कुलांचे भरने लगेगा।िवगयापन वाले अपनी देहरी पर मत्था टेंकने लगेंगे। हमारी-अापकी बल्ले-बल्ले हो जायेगी।मेरे कई ब्लॉगर साथी इस मिहमा को पहचान गयें हैं। िमतरों-पिरिचतों से ब्लॉग देखने और िटप्पणी देने का अनुरोध िबना लजाये करते रहते हैं। वैसे ही जैसे एक िफल्म का नायक कटोरा िलए मांगता था,दे दाता के नाम....
मैं जबसे ब्लािगस्ट बना हूं,अपना देखने के अलावा दूसरों का भी देखता हूं। भाई उड़नतश्तरी हर डाल पर बैठे नजर अाते हैं।मोहतरमा शोभा जी भी उनके साथ गुटरगूं करती नजर अाती हैं। इन दोनों को ब्लािगस्टों की हौसला अफजाई के िलए पऱणाम।िटप्पणी की डाल पर इनके अलावा कुछ और नाम अक्सर टंगे िमलते हैं। यहां तक तो ठीक है,लेिकन ये शब्दों को लेकर इतने कंजूस हैं िक बधाई हो,अच्छा िलख रहे हैं,स्वागत है से ज्यादा कुछ नहीं िलखते। लगता है िक ये अालेख नहीं पढ़ते,बस जैसे ही कोई नया ब्लॉगर अाता है ये पहले से टाइप िटप्पणी उस पर िचपका देते हैं।
बहरहाल,मुझे ब्लाग पर अाये महीना से ऊपर होने को है। खेल-खेल में अा गया था। फुरसत में नाम के अपने ब्लॉग पर फुरसत में कुछ-कुछ िलखने लगा। िफट्जी से पता चला िक देश-िवदेश में लोग पढ़ रहे हैं। मैं गंभीर हो गया। जब इतने लोग पढ़ रहे हैं,तो कुछ भी िलखने से बेहतर है िक कुछ अलग िलखा जाये।इसके िलए एक नया ब्लॉग डाकघर शुरू िकया। यह िबहार-झारखंड के नक्सिलयों से जुड़ा है। बतौर पतरकार मैं इनसे जुड़ा रहा हूं और इनकी खुिबयों-खािमयों का गवाह भी रहा हूं।यही अनुभव िसलिसलेवार िलख रहा हूं।ब्लॉग फुरसत में, में मैं वैसी चीजों को शािमल करता हूं,जो पटना से जुड़ी मेरी यादों में है । वहीं नेता और अिभनेता का फकॆ िमटा देनेवाले लालू पऱसाद यादव से िविभन्न मसलों पर अॉफ दी िरकाडॆ इंटरव्यू के बहानेे वैसी चीजों पर केंदिरत हूं,जो छपने और िदखाने पर लालू जैसे अगंभीर व्यिक्त भी गंभीर हो जाये।
अब यही फुल स्टॉप लगाता हूं। इस अनुरोध के साथ िक िबना मेरे अालेख को पढ़े अापकी िटप्पणी मुझे नहीं चािहए।

5 comments:

हिन्दी के लिक्खाड़ said...

गजब लिखा है गजब। िहन्दी को आप जैसs विचारकों की ही जरूरत है।

शुभकामनाएं
डॉ. भानु प्रताप सिहं

हिन्दी के लिक्खाड़ said...

गजब लिखा है गजब। िहन्दी को आप जैसs विचारकों की ही जरूरत है।

शुभकामनाएं
डॉ. भानु प्रताप सिहं

हिन्दी के लिक्खाड़ said...

गजब लिखा है गजब। िहन्दी को आप जैसs विचारकों की ही जरूरत है।

शुभकामनाएं
डॉ. भानु प्रताप सिहं

संगीता पुरी said...

और आलेख क्‍यों नहीं पोस्‍ट कर रहे हैं आप ?

अभिषेक मिश्र said...

Accha pryas hai aapka. 'Dakghar' mein tippani post karne ka option nahin hai kya!