Aug 11, 2008

१८ माचॆ १९७४ को पटना

पटना जल रहा था,दहशत का अालम था
ेसेकऱेटेिरएट और सचॆलाइट अखबार को फूंका
िवधायक भोला बाबू के घर के पास मारे गये लड़के
जयपऱकाश नारायण िगरफ्तार हो चुके थे
घर-घर बीबीसी बना िवश्वसनीय

अारब्लॉक का रोड नं.तीन । सुबह अाठ बजते-बजते लोगों से भर गया था। ये िवद्याथीॆ थे। गुरू जी थे जयपऱकाश नारायण। उन्हीं के बुलावे पर ये िवधानसभा घेरने अाये थे। िवधानसभा को हर तरफ से बैरेकेिटंग कर िदया गया था। डंडों और रायफलों से लैस खाकी वदीवाले भी मुस्तैद थे। पूरे वातावरण में एक अजीब सी दहशत थी। बड़े-बुजुगॆ कह रहे थे,इन छोकड़ों का क्या भरोसा कहीं कुछ अनहोनी न कर बैठें। मैं टूटा पांव िलये घर के गेट के पास बैठा सब देख-सुन रहा था। दस बजे गोली चलने जैसी अावाज अाने लगी। भगदड़ मच गयी। लड़के भागते,िफर जुट जाते। पता चला िक टीयर गैस छोड़ने की अावाजें थीं। पुिलस की नौकरी बजानेवाले मेंरे चाचा जी ने नल से पाइप जोड़ गेट के बाहर रख िदया। लड़कों का हुजूम अांख धोने लगा। यह िसलिसला चल ही रहा था िक एक बार िफर गोिलयों की अावाज अाने लगी। इस बार वह अावाज काफी नजदीक लग रही थी। भीड़ छंटने लगी और देखते-देखते सड़क खाली हो गयी। िजतने मुंह उतनी बातें होने लगी। पता चला िक रोड नं.छह में िवधायक भोला बाबू के घर के पास चार लड़कों को गोली लगी है। बेली रोड में भी गोली चलने की बात सामने अायी। दोपहर होते-होते बस एक ही सूचना हर तरफ से अा रही थी,एक दजॆन लड़के मारे गये हैं। तभी सूचना अायी िक िबना बांउंडॆी वाले िवधानसभा और सेकऱेटेिरएट को फूंक िदया गया है। सचॆलाइट अखबार में भी अाग लगायी गयी है। कुछ जगहों पर दुकानों में तोड़-फोड़ और लूट की बात भी सुनने को िमली। चाचा जी ने शाम होते ही सभी को घर के भीतर रहने की िहदायत देकर दरवाजा बंद कर िदया। शाम साढ़े सात बजे रेिडयो से पऱादेिशक समाचार सुनने को सभी बेचैन थे। वो घड़ी भी अायी। अांदोलन की घटनाअों से जुड़ी खबर िनराश करनेवाली थी। िजतना हल्ला था,उसका थोड़ा सा भी उल्लेख खबर में नहीं थी। िफर बीबीसी लगाया गया। पटना जल रहा है की खबर से लगा िक िदनभर सुनी-देखी बातों में दम है। हालांिक उसमें भी मरने और घायल होनेवाले की संख्या हमारी सूचना से मेल नहीं खा रहे थे। बस अगलगी की घटनाअों की पुिष्ट हुई। बीबीसी से ही पता चला िक हजारों लोगों को िगरफ्तार िकया गया है। जयपऱकाश नारायण का िसर पुिलस की लाठी से फूट गया है। अब हमें इंतजार था िक कल क्या होगा?

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