तो फुरसत में भी िबजी रहने का नया लाइन िमल गया है। कितपय नजदीकी असेॆ से ब्लािगस्ट बने हुए हैं। इसे लेकर तरह-तरह की बतकही भी करते हैं। मैं मूक श्रोता बन सुनता-गुनता रहा हूं। हरेक ने अपने ब्लाग का नाम अपने तरीके से रखा है। अजब-गजब नामों का यह खेल मेरी समझ में कभी नहीं अाया। शायद कुछ नया लगे इसका ही उसमें अागऱह होगा।
जब मैंने अपना ब्लाग लाने को सोचा,तो नाम के घनचक्कर में उलझ गया। कुछ लोगों ने नाम भी सुझाया। अटपटे नामों से पीछा छुड़ा फुरसत में मनन कर नाम रखा फुरसत में। तय है िलखूंगा भी फुरसत में ही और फुरसत में ही िटप्पणी भेजनेवालों को जवाब भी दूंगा। अभी फुरसत नहीं है,संभव है एक दो िदन में इसके िलए फुरसत िनकाल लूं। तब तक के िलए बॉय-बॉय।
Aug 10, 2008
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